
रांची: भारत में ट्रेन के समय पर पहुंचना जितना मुश्किल है उतना हीं मुश्किल होता है ट्रेन में कन्फर्म टिकट का मिलना. अगर कोई फेस्टिव सीजन हो तो टिकट का मिलना और मुश्किल हो जाता है. लेकिन वही टिकट अगर आप दलालों से कराएं तो आसानी से मिल जाता है. इन दलालों की वजह से तत्काल टिकट मिलना आम लोगों के लिए काफी मुश्किल हो जाता है. ये लोग बहुत शातिराना अंदाज में टिकट की दलाली कर रहे है. इसके लिए कई तरह सॉफ्टवेयर का उपयोग करके ये लोग टिकट की दलाली कर रहे है.
टिकट की दलाली करने वाले एजेंट प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके एक बार में 20 से 25 टिकट काटते हैं. इसके लिए ये लोग फेक आईडी बनाते हैं. इन फेक निजी आईडी का इस्तेमाल करके टिकट काटते हैं. आईडी जो आधार से लिंक नहीं है उससे एक महीने में छह टिकट और जो आईडी आधार से लिंक नहीं है उससे एक बार में 12 टिकट काट सकते हैं. लेकिन ये लोग निजी आईडजी का इस्तेमाल व्यवसायीकरण करने के लिए करते हैं. इस तरह से निजी आईडी का इस्तेमाल करना रेलवे द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया है. ऐसे में पकड़े जाने पर कारवाई भी की जाती है. लेकिन फिर भी टिकट दलालों के तरफ से ऐसी घटनाओं में कमी नहीं आई है.