जमशेदपुर : शिक्षिका की चिता कि आग ठंडी भी नहीं हुई और वीमेंस यूनिवर्सिटी में हुआ रैम्प वाक व डांस



जमशेदपुर : एक दिन पहले पिछले 8 जनवरी को ही वीमेंस यूनिवर्सिटी के खेल विभाग की शिक्षक शांति मुक्ता बारला की सड़क दुर्घटना में मौत हो गया है. स्व बारला के योगदान को वीमेंस कॉलेज से लेकर वीमेंस यूनिवर्सिटी तक को खेल की दुनिया में राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहचान दिलाने में भुलाया नही जा सकता. बावजूद उनकी चिता की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई और यूनिवर्सिटी में रैम्प वाक और डांस का दौर शुरू हो गया है. अब तो यहां तक कहा जा रहा है कि आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली इस शिक्षिका की मौत पर कम से कम एक दिन का शोक रखने के बजाय डांस और डीजे का दौर चला.

मंगलवार को यूनिवर्सिटी में शोक दिवस मना कर सभी कार्य को एक दिन के लिए स्थगित किया जाना चाहिए था. वहीं झारखंड बिगेस्ट फेस्ट के नाम पर परिसर के ओडिटेरियम में रैंप वॉक, डांस करवाया गया. इस पर छात्र संगठनों ने भी तीखी प्रतिक्रिया जतायी है. आजसू छात्र संघ ने कहा है कि आखिर एक शैक्षणिक संस्थान कैसे अपने मानवीय मूल्यों को भूल सकता है. एक शिक्षिका जिनका पार्थिव शरीर चिता पर है और उनके के साथ कार्य करने वाले बड़े पदाधिकारी अपनी आत्मीयता को भूल कर इस तरह के आयोजन की स्वीकृति कैसे प्रदान कर देते हैं.

आजसू छात्र संघ के कोल्हान अध्यक्ष हेमंत पाठक ने कहा कि अपने नए-नए कारनामे के कारण जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी पहले से ही मशहूर है. चाहे वह सिदगोड़ा कैंपस का ओपनिंग फिर से कराने के लिए लाखों रुपए पानी की बहाना और खुद ही प्रोग्राम कैंसल कर देना हो. अब तो हद ही हो गयी है, वीमेंस यूनिवर्सिटी की शिक्षिका शांति मुक्ता बारला की मौत वीमेंस यूनिवर्सिटी के लिए अपूर्णीय क्षति है, लेकिन शोक मानने के स्थान पर नाच-गाना के कार्यक्रम के आयोजन की स्वीकृति प्रदान कर दी गयी. आजसू छात्र संघ के नेताओ ने फोन पर संबंधित लोगो को फोन पर समझाया तो प्रोग्राम बंद कर दिया गया. आजसू छात्र संघ कल यूनिवर्सिटी पहुंच कर संबंधित पदाधिकारी से मुलाकात करेगा और संतोषप्रद जवाब न मिलने राज्यपाल से शिकायत की जायेगी.

यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता ने बताया कि मंगलवार को आरवीएस अकादमी का डांस ऑडिशन जमशेदपुर वीमेंस् यूनिवर्सिटी में हुआ. यह कार्यक्रम जमशेदपुर वीमेंस् यूनिवर्सिटी के प्रांगण में करने की अनुमति नहीं मिली थी. प्रोफेसर शांति मुक्त बरला के निधन से पूरे विश्वविद्यालय में एक सन्नाटा सा छाया हुआ है. अतः इस कार्यक्रम को आज करने की अनुमति नहीं दी गई थी.

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