'पिटबुल' जैसा शब्द इस्तेमाल करना बर्दाश्त नहीं, ये झारखंडी अस्मिता के साथ खिलवाड़: मरांडी

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टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने एक ट्वीट किया है। इस ट्विट में उन्होंने कहा है कि कैश फॉर क्वेरी मामले में उनके खिलाफ लोकपाल ने गलत फैसला सुनाया है। बता दें कि लोकपाल ने कैश फॉर क्वेरी मामले की जांच सीबीआई से कराने का फैसला लिया है। इस मामले को सबसे पहली बार झारखंड के गोड्डा बीजेपी सासंद निशिकांत दुबे ने संसद में उठाया था। महुआ ने इसी से प्रेरित होकर ट्वीट किया है। ट्वीट में उन्होंने लिखा है, हो सकता है झारखंड की 'पिटबुल एसोसिएशन' भी बीजेपी के अधीन लोकपाल समिति के रूप में काम कर रहा हो। बाबूलाल मरांडी ने इसी ट्वीट पर आपत्ति जाहिर की है।   


मरांडी ने जवाबी ट्वीट में कहा है कि झारखंड के लोगों के लिए 'पिटबुल' जैसा शब्द इस्तेमाल करना बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। ये झारखंडी अस्मिता के साथ खिलवाड़ है। प बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को चाहिये कि वे तुरंत अपने सांसद महुआ मोइत्रा से इस्तीफा लें। गौरतलब है पिटबुल अमेरिकन नस्ल के एक कुत्ते को कहा जाता है। बहरहाल, बाबूलाल ने महुआ को सलाह देते हुए कहा है कि आपको कानून का सामना करना चाहिये। अगर आप दोषी नहीं है तो आपको डरने या घबराने की जरूरत नहीं है। बता दें कि महुआ ने खुद पर लगे आरोपों की जांच सीबीआई से कराने पर आपत्ति दर्ज की है। जानकारों का मानना है कि इससे महुआ की सांसद सदस्यता खतरे में पड़ सकती है। टीएमसी सांसद के ट्वीट का जवाब सांसद निशिकांत दुबे ने भी दिया है। उन्होंने बिना नाम लिये महुआ पर पैसे लेकर जमीर बेचने का आरोप लगाया है। 

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