राज्यपाल ने सरकार को फिर लौटाया 1932 के खतियान आधारित स्थानीय नीति विधेयक

राज्यपाल CP राधाकृष्णन ने सरकार को फिर लौटाया 1932 के खतियान आधारित स्थानीय नीति विधेयक

रांची:1932 के खतियान आधारित स्थानीय नीति के विधेयक को राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने फिर से राज्य सरकार को वापस लौटा दिया है. साथ ही इसपर विधानसभा को पुनर्विचार करने की बात भी कही है. आपको बता दें विधेयक में शामिल कानूनी मुद्दों पर राजभवन की तरफ से अटर्नी जनरल से राय मांगी गई थी जिसके बाद 15 नवंबर 2023 को राजभवन ने अटर्नी की राय मिलने पर विधेयक को लौटा दिया. साथ ही अपने संदेश के जरिए राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने अटर्नी की राय से विधानसभा को अवगत करा दिया है. 
 
अटर्नी जनरल ने अपने राय में कहा है कि 1932 के खतियान आधारित स्थानीय नीति विधेयक में स्थानीय व्यक्ति शब्द की परिभाषा लोगों की आकांक्षाओं के अनुकूल है. जो कि स्थानीय परिस्थितियों के संस्कृति और लोकाचार के साथ फिट बैठती है. साथ ही यह तर्कसंगत और वस्तुनिष्ठ मानदंडों पर आधारित नजर आता है. मगर, ऐसा लगता है जैसे कि विधेयक की धारा 6A संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 162 का उल्लंघन कर सकती है और यह अमान्य भी हो सकती है. हालांकि, पारा 24 में मेरी राय पर अमल करने से बचाया जा सकता है.
 
आगे अपने राय में अटर्नी जनरल ने यह बताया है कि स्थानीय नीति विधेयक के अनुसार, प्रदेश सरकार की तीसरे और चौथे श्रेणी की नौकरियां में प्रदेश के स्थानीय निवासियों के लिए ही सिर्फ आरक्षित होंगे. इसके साथ ही प्रदेश के स्थानीय लोगों के अलावा अन्य लोगों की नियुक्तियों पर पूरी तरह से रोक रहेगी. अपनी राय में अटर्नी जनरल ने कहा है कि मुझे ऐसा लगता है कि तीसरे और चौथे श्रेणियों की नौकरियों के लिए अन्य लोगों को आदन करने से वचिंत नहीं किया जा सकता है. इसके विपरीत यह सुरक्षित तरकीब है कि स्थानीय लोगों (व्यक्तियों) को सभी चीजों में समान प्राथमिकता दी जाए, हालांकि स्थानीय व्यक्तियों पर चौथे श्रेणी के लिए विचार किया जा सकता है. 
 
आपको बता दें, 11 नवंबर 2022 को विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया था जिसमें 1932 के खतियान आधारित स्थानीय नीति विधेयक को पारित किया गया था. जिसके बाद इस विधेयक को मंजूरी के लिए राजभवन भेजा गया था मगर इसी साल जनवरी में प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल रमेश बैस ने यह कहकर विधेयक को वापस लौटा दिया था कि विधेयक की वैधानिकता की गंभीरतापूर्वक समीक्षा करें कि यह विधेयक संविधान के प्रावधानों के अनुरूप है या नहीं. उन्होंने यह भी कहा था कि विधेयक में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना तो नहीं हो रही है. 

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