भोपाल: दुनिया की सबसे भीषण औद्योगिक आपदा मानी जाने वाली 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों की याद में शनिवार को बंद हो चुकी यूनियन कार्बाइड कारखाने के पास मोमबत्ती जलाकर जुलूस निकाला गया।
जुलूस में मुआवजे, स्वास्थ्य देखभाल और न्याय की मांग करते हुए तख्तियां लिये हुए ज्यादातर महिलाएं शामिल थीं। जुलूस यहां सिंधी कॉलोनी से शुरू हुआ और कारखाने के नजदीक पीड़ितों के स्मारक पर समाप्त हुआ।
भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशन भोगी संघर्ष मोर्चा के बालकृष्ण नामदेव ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘हम चाहते हैं कि डाउ केमिकल, जिसने यूनियन कार्बाइड का अधिग्रहण कर लिया है, को मामले का हिस्सा बनाया जाए। कारखाने के अंदर पड़े कचरे को हटाया जाना चाहिए क्योंकि यह रिस रहा है और भूमिगत जल को दूषित कर रहा है। कारखाने के पास घनी आबादी वाली कॉलोनी में दूषित भूमिगत जल का उपयोग किया जा रहा है।’’
नामदेव ने कहा कि उनके संगठन ने आज दोपहर नीलम पार्क में डाउ केमिकल का पुतला जलाया।
संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्ष रशीदा बी ने कहा, ‘‘यूनियन कार्बाइड और डाउ केमिकल ने गैस पीड़ितों के बच्चों में जन्मजात विकृतियां और स्वास्थ्य को पहुंची क्षति के लिए अभी तक मुआवजा नहीं दिया है।’’
दो और तीन दिसंबर 1984 की मध्यरात्रि में कीटनाशक कारखाने से जहरीली गैस के रिसाव के बाद कम से कम 3,787 लोग मारे गए थे और पांच लाख से अधिक लोग शारीरिक रूप से प्रभावित हो गये।
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