सरायकेला। संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली द्वारा पहली बार आयोजित भारत की सनातन गुरु शिष्य परंपरा पर आधारित अकादमी की प्रशिक्षण परियोजना के कला दीक्षा कार्यक्रम के तहत गुरु सम्मान प्रदान किया गया। इसके तहत सरायकेला के पारंपरिक छऊ शिल्पकार गुरु सुशांत कुमार महापात्र एवं पारंपरिक छऊ नृत्य कलाकार गुरु मलय कुमार साहू को गुरु सम्मान से सम्मानित किया गया। नई दिल्ली में आयोजित उक्त कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि भारत सरकार के संस्कृति मंत्री जी कृष्ण रेड्डी एवं विशिष्ट अतिथि संस्कृति एवं संसदीय राज्य मंत्री तथा कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली के अध्यक्ष डॉ संध्या पूरेचा, संयुक्त सचिव उमा नांदुरी एवम गणमान्य सदस्यों की उपस्थिति में उन्हें गुरु सम्मान से नवाजा गया। यह पल सरायकेला छऊ जगत के लिए गौरव का रहा।
गुरु सुशांत कुमार महापात्र को यह सम्मान छऊ नृत्य का मुखौटा तैयार करने के लिए दिया गया। बताते चलें कि विश्व प्रसिद्ध सरायकेला शैली के छऊ नृत्य में मुखौटे का विशेष महत्व है। गुरु सुशांत कुमार महापात्र द्वारा बनाए गए छऊ मुखौटे की प्रदर्शनी देश सहित विदेशों में भी लगाई जा चुकी है। उनके द्वारा तैयार किए गए सरायकेला शैली के छऊ मुखौटे का प्रदर्शन देश की राजधानी दिल्ली सहित मुंबई, कोलकाता एवं अन्य बड़े शहरों में किया जा चुका है। इसके अलावा विदेशों में अमेरिका के न्यूयॉर्क, बर्लिन और विएना में किया जा चुका है। छऊ मुखौटा निर्माण का इतिहास बताता है कि वर्ष 1925 में उनके बड़े पिताजी गुरु प्रसन्न कुमार महापात्र ने सरायकेला शैली छऊ के लिए पहला आधुनिक मुखौटा तैयार किया था। गुरु सुशांत कुमार महापात्र ने मात्र 8 साल की उम्र में ही अपने बड़े पिताजी गुरु प्रसन्न कुमार महापात्र की प्रेरणा से मुखौटा निर्माण का कार्य शुरू किया था। इसके पश्चात मुखौटा का प्रचलन बढ़ने लगा। और अब यही मुखौटा सरायकेला शैली छऊ नृत्य की पहचान बन गई है। अपना समूचा जीवन छऊ मुखौटा निर्माण कला को समर्पित कर चुके गुरु सुशांत कुमार महापात्र को इस कला के लिए वर्ष 1973 में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा सीनियर स्कॉलरशिप सहित भारत सरकार और राज्य सरकार से कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।
गुरु मलय कुमार साहू पारंपरिक छऊ नृत्य कलाकार की ज्ञाता रहे हैं। जिन्होंने अपने स्वर्गीय पिता पद्मश्री केदार नाथ साहू से छऊ नृत्य कला की विधिवत शिक्षा हासिल की थी। और अपनी छऊ नृत्य कला से देश सहित विदेशों में भी अपनी पहचान स्थापित किए हैं। गुरु मलय कुमार साहू सरायकेला के प्रतिष्ठित श्री केदार आर्ट सेंटर के डायरेक्टर हैं। और अपने स्वर्गीय पिता केदार नाथ साहू की मार्ग निर्देशन में बचपन से ही छऊ नृत्य कला से जुड़े हुए हैं। विशेष कर बच्चों को छऊ नृत्य सिखाने से लेकर देश-विदेश में छऊ नृत्य के प्रचार प्रसार में इनकी विशेष भूमिका रही है। गुरु मलय कुमार साहू को वर्ष 1979 में भारत सरकार के मिनिस्ट्री आफ कल्चर द्वारा नेशनल अवार्ड ऑफ स्कॉलरशिप से नवाजा जा चुका है। इसके अलावा वर्ष 1987 में भारत सरकार सांस्कृतिक मंत्रालय द्वारा सीनियर स्कॉलरशिप, वर्ष 2000 में जूनियर फैलोशिप और वर्ष 2009 में सीनियर फैलोशिप से नवाजा जा चुका है। गुरु मलय कुमार साहू देश के विभिन्न मंचों सहित विदेशी धरती पर फ्रांस, साउथ कोरिया, मलेशिया, इंडोनेशिया, रूस, इटली, मेक्सिको, अरूबा, वेनेजुएला, पनामा, कोस्टा रिका, क्यूरिकोवा, मंगोलिया, ब्राज़ील एवं बांग्लादेश में भी छऊ नृत्य की प्रस्तुति कर चुके हैं।
