चाईबासा : पूर्व विधायक मंगल सिंह बोबोंगा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल 31 दिसम्बर को अंग्रेजों के साथ लड़ाई के दौरान शहीद हुये नारा पोटो हो की शहीद स्मारक राजाबासा से खरसावां गोलीकांड स्थित शहीद स्थल के लिये रवाना हुये. 1 जनवरी को सभी खरसवां गोली कांड के शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे. खरसवां जाने वालों में सन्नी सिंकू, नवाज हुसैन, धीरज गागराई, सीताराम लागुरी, सुहैल अहमद, जोलेन भुईंया, बामेश बेहरा, शाहिद आलम, कन्दर्प गोप, कृष्णा सिंकू आदि के अलावे सैकड़ों शामिल हैं. यह दल आज राजा बासा स्थित पोटो हो स्मारक से जगन्नाथपुर होते सेरेंगसिया शहीद स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुये चाईबासा के लिये रवाना हुये. रास्ते के विभिन्न गांवों से लोग जुड़ते गये. 31 दिसम्बर को चाईबासा में रात्रि विश्राम एवं 1 जनवरी को खरसवां में शहीदों को श्रद्धांजलि दिया जायेगा.
इस संबंध में पूर्व विधायक मंगल सिंह बोबोंगा ने कहा कि आजादी के पहले नारा पोटो हो ने अंग्रेजों के खिलाफ सबसे बडा़ पहला विद्रोह छेडा़ था. लेकिन इस विद्रोह को आज तक इतिहास में कहीं जगह नहीं मिला, और न हीं स्कूली पाठ्यक्रमों में शामिल किया गया, और न हीं इन शहीदों को सम्मान देने का कार्य हुआ. इस मामले को लेकर आवाज उठाना है. दूसरी बात यह है कि 1 जनवरी 1948 का आजादी के बाद का पहला खरसवां का गोलीकांड जो जलियावाला बाग गोलीकांड को भी पीछे छोड़ दिया है. इस गोलीकांड में 2 हजार से अधिक लोग मारे गये थे. इसके बाद मार्शल ला लागू किया गया था.
इस गोलीकांड को अंजाम देने वाली ओडि़सा सरकार ने 32, बंगाल ने 35 तथा बिहार ने 48 आदिवासियों के मारे जाने की बात अपनी-अपनी रिपोर्ट में कही. इस मामले में कहीं भी समानता नहीं है. लेकिन पूर्व के सांसद के पी देव ने अपने किताब में दो हजार से अधिक आदिवासियों के मारे जाने की बात लिखी है जो प्रत्यक्षदर्शियों की बातों से मेल खाता है. बोबोंगा ने कहा कि हम चाहते हैं कि सरकार ने एक ट्रीब्यूनल रिपोर्ट बनाया है, जो सार्वजनिक नहीं किया है उसका रिपोर्ट कमीशन गठीत व जाँच कर सार्वजनिक करना चाहिए. खरसवां गोलीकांड को आजाद भारत का पहला गोलीकांड का दर्जा देते हुये शहीदों को सम्मान व उनके परिजनों से सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए.
