कन्नौज: कन्नौज सदर तहसील में कार्यरत अधिवक्ताओं ने आज समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण को एक संयुक्त ज्ञापन देकर सदर तहसील से लेकर जिलाधिकारी न्यायालय तक की तमाम खामियां उजागर कर विस्तृत जांच की मांग की है। ज्ञापन में विंदुबार अनेक आरोप लगाए गए है।
ज्ञापन के मुताबिक तहसील सदर स्थित आर०के० कार्यालय/ नायब तहसीलदार कन्नौज/ जलालाबाद के न्यायालयों में प्राइवेट व्यक्तियों या दलालों का बोलबाला है। न्यायालय व कार्यालय में तमाम निर्विवाद नामान्तरण बाद महीनों बिना दर्ज किये हुये पड़े रहते है। कई महीनों बाद भी उनमें नामांतरण आदेश पारित नहीं किये जाते है। तमाम बादो में आदेश पारित हो जाने के उपरान्त भी आदेश कम्प्यूटर में दर्ज नहीं होते है तथा खतौनियों में नानान्तरण आदेशों का अमल दरामद होने में बहुत लम्बा समय लग जाता है। साधरण मामलों में आदेश पारित होकर खतौनी में दर्ज होने में औसतन तीन से भार नाह का समय लग जाता है। जबकि राजस्व संहिता में निर्विवाद वादों में नामान्तरण प्रक्रिया को पूर्ण करने का समय 45 दिन निर्धारित किया गया है।
तमाम चकबन्दी विभाग से सर्वेक्षण विभाग से आयी जिल्दों की नई खतोनिया वर्षा से नहीं बन पा रही है। जिससे सामान्य काश्तकारों को खतौनी न होने के कारण तमाम सरकारी योजनाओ का लाभ या सहायता प्राप्त होने से वंचित रहना पड़ रहा है।
उप जिलाधिकारी कन्नौज/ उप जिलाधिकारी न्यायिक कन्नौज के यहां अत्यधिक अनिमित्तताये है। उक्त दोनों न्यायालयों में हर सुनवाई की तिथि पर तमाम फाइले गायब हो जाती है। जो कई कई सप्ताह तक नहीं मिल पाती है। जिससे वादकारी जनता व अधिवक्ताओं को घोर कष्ट का सामना करना पड़ रहा है। सुनवाई के बाद भी तमाम बाद महीनों पड़े रहते है जिनमें आदेश नहीं होते हैं। ऐसी स्थिति में तमाम काश्तकार दलालों का शिकार होकर शोषित होते हैं और अधिवक्तागणों को भी परेशानी होती है। न्यायालयों में मेड़बंदी के वादों की स्थिति बेहद दयनीय है। मेढबन्दी के वाद दायर कर मेड़बन्दी कराना बेहद कठिन व अत्यधिक खचीला कार्य है। अधिकांश काश्तकार इतनी अधिक रकम जुटा पाने के कारण मेडबन्दी करा ही नहीं पाते है। जब भी कोई वादकारी मेड़बंदी दायर करता है तो उसे कच्ची पैमाइश आख्या मंगवाने हेतु प्राय भारी धनराशि खर्च करनी पड़ती है। इतना खर्च करने के बाद जब मेड़बंदी आख्या न्यायालय में आ जाती है तो उक्त आख्या की पुष्टि कराने हेतु सम्बन्धित राजस्व निरीक्षक के बयान कराने में भी प्राय भारी धनराशि पुनः खर्च करनी पड़ती है।
इसके बाद यदि न्यायालय द्वारा निशुल्क कोई आदेश पारित भी कर दिया जाता है। तो मेडबन्दी आदेश का अनुपालन कराने हेतु मौके पर पैमाइश कराकर कब्जा प्राप्त करना मुश्किल हो जाता है। प्राप्त करने में प्राय धनराशि खर्च करनी पड़ती है। इसी प्रकार विभाजन वादों में भी अंश निर्धारित हो जाने के बाद तमाम गरीब कास्तकारों के कुरे लेखपालों द्वारा भेजे ही नहीं जाते है।. विभाजन वाद में यदि वादी येन कंन प्रकारेण आदेश करा भी लेता है तो अधिकतर गरीब काश्तकारों की मौके पर कुराबन्दी ही नहीं की जाती है। इसी प्रकार दुरुस्ती बाद में अत्यधिक लापरवाही होने के कारण हम अधिवक्तागणों ने दुरुस्ती बाद दायर करना लगभग बन्द कर दिया है। इसी प्रकार जो कास्तकार आसामी है. नियमानुसार उनो असंकमणीय भूमिधऱ घोषित किया जाना चाहिए लेकिन आज तक किसी आसामी काशतकार को आसानी से असंक्रमणीय भूमिधर घोषित नहीं किया जाता है। परन्तु तमाम गरीब आसामी काश्तकारों के पट्टे अवैध ढंग से निरस्त किये जा रहे हैं। इसी प्रकार असँकमणीय भूमिधर नियमानुसार पाच वर्ष बाद संकमणीय भूमिधर घोषित किया जाना चाहिए लेकिन कुछ सम्पन्न असक्रमणीय भूमिधरी को ही भूमिधर घोषित किया जा रहा है। इसी प्रकार उप जिलाधिकारी सदर के न्यायालय में भारी आर्थिक शोषण किया जा रहा है। जब भी कोई काश्तकार कन्नौज नगर पालिका क्षेत्र आसपास प्लाट खरीद कर मकान बनाने की कोशिश करता है तो अधिकतर मामलों में विनियमित क्षेत्र के विभिन्न कर्मचारियों व उनके दलालों द्वारा मानचित्र के नाम पर भारी रकम उगाही करन प्रकरण प्राय सामने आते है। नगर क्षेत्र कन्नौज में प्रतिवर्ष हजारों आवासीय भू-खण्ड क्रय किये जाते है तथा उन पर आवास बनाये जाते है। जिसमें से ज्यादातर मकान बनाने वालों का आर्थिक शोषण किया जाता है। मकान बनाने वाले व्यक्ति को मानचित्र स्वीकृत न होने का भय दर्शाकर अनुचित बसूली भी कर ली जाती है।
सर्वेक्षण विभाग में भारी अनिमिततायें व्याप्त है उक्त न्यायालय में उप निबन्धक कन्नौज द्वारा अन्तरण के लिए प्रेषित किये गये नामान्तरण वादों को दर्ज न करके सभी को कुड़े के ढेर दिया जाता है। केवल जो कास्तकार अच्छी खासी रकम खर्च करके वाद दायर करते है, उनमें ही नामान्तरण आदेश पारित किया जाता है जबकि नियमानुसार उप निबन्धक कार्यालय द्वारा निर्विवाद नामान्तरण वादों के प्रपत्रों को प्राप्त करने के उपरान्त दर्ज कर निशुल्क नामान्तरण पारित किया जाना चाहिए।
तहसील कन्नौज के तमाम ग्राम चकबन्दी अभिक्रियाओं के अधीन है। उनमें चकबन्दी द्वारा काश्तकारों का शोषण किया जाता है। उक्त चकबन्दी न्यायालयों में नामान्तरण आदेश करने में प्रायः वादकारी जनता का शोषण किया जाता है। अधिवक्ताओं द्वारा विरोध करने पर अधिवक्ताओं के विरुद्ध झूठे मुकदमें दर्ज कराने की धमकियां दी जाती है।
उक्त सम्बन्ध में कई बार उप जिलाधिकारी सदर कन्नौज व अन्य सम्बन्धित अधिकारियो द्वारा समस्याओं का निराकरण कराये जाने का आश्वसन दिये जाने के बावजूद समस्याओं क धरातलीय निस्तारण नही हुआ है। वरन् दिन प्रतिदिन नई नई समस्यायें उत्पन्न की जा रही है।
जिलाधिकारी के न्यायालय में कार्यरत पेशकार पीठासीन अधिकारी की अनुपस्थिति न्यायालय में न्यायिक कार्य न होने के बावजूद स्वय आदेश पत्रक पर वाद के प्रकम को बदल दिया जाता है। उक्त पेशकार की विवादित कार्यशैली से अधिवक्ता क्षुब्ध है। इसके बावजूद उक्त करीब 10 वर्षों से इसी पद पर जमे है।
अधिवक्तागण द्वारा उक्त खामियों को बार बार उजागर कर दूर किये जाने की माग जाने के बावजूद कोई कार्यवाही न होने व प्रशासनिक अकर्मण्यता व तेजी से बढ़ रहे भ्रष्टाचार के कारण न्यायिक कार्य वाधित होने से अधिवक्तागणों के समक्ष उनकी अजीविका का संकट उत्पन्न हो रहा है।
इस सम्बन्ध में अधिवक्तागणों ने उप जिलाधिकारी सदर व जिलाधिकारी कन्नीज जिला प्रशासन के अधिकारियों को कई बार प्रस्ताव व ज्ञापन देकर उक्त समस्याओं के निस्तारण मांग की। लेकिन जिलाधिकारी कन्नौज व अन्य अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा कोई निस्तारण हेतु नही किया गया। जिससे जनपद कन्नौज के राजस्व व चकबन्दी न्यायालयों में स्थितियों लगातार बदत्तर हो रही है। जिससे हम अधिवक्तागण उक्त न्यायालयों में सम्मान पूर्वक कार्य करने में असहज महसूस कर रहे है।
अतः जनपद कन्नौज के सभी अधिवक्तागण यह ज्ञापन जनपद कन्नौज के तहसील व कलेक्ट्रेट स्थित सभी न्यायालयों में व्याप्त अनियमितताओं भ्रष्टाचार, लापरवाही से हो रही वादकारियों व पीडित जनता व अधिवक्तागण को हो रही परेशानियों व सम निष्पक्ष व निःशुल्क न्याय मिलने में उत्पन्न हो रहे अवरोधों पर माननीय महोदय, का ध्यान आ कराते हुये उक्त वर्णित समस्याओं के निराकरण हेतु याचना कर रहे है। निवेदन करते है कि उक्त ज्ञापन के परिपेक्ष्य में की गयी जांच व कारवाई से अधिवक्तागणों को भी अवगत कराया जावें।
