कन्नौज: अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश / पूर्णकालिक सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण लवली जायसवाल द्वारा आज जिला कारागार कन्नौज का निरीक्षण किया गया। श्रीमती जायसवाल द्वारा जिला कारागार में निरूद्ध बंदियों से उनके खानपान, चिकित्सा एवं उनके मुकदमों में पैरवी हेतु अधिवक्ताओं के संबंध में जानकारी ली गयी तथा उनकी समस्याओं को सुना गया एवं उनके निराकरण हेतु जेलर एवं जेल अधीक्षक को निर्देशित किया गया।
निरीक्षण के दौरान अस्पताल में कुल 11 बन्दी भर्ती पाये गये जिनमें से 01 बंदी टी०वी० के मरीज पाये गये जिनकी उचित देखभाल, दवाई व पोष्टिक भोजन दिये जाने हेतु व अस्पताल की साफ सफाई कराये जाने के सम्बन्ध में एवं ऐसे निरूद्ध बंदी जिन्हें बेहतर चिकित्सीय सुविधा प्राप्त करने हेतु बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया है उन्हें समय से समुचित इलाज दिलाये जाने हेतु संबंधित अस्पतालों में ले जाने के लिये पुलिस अधीक्षक से गारद की माँग किये जाने हेतु अनुरोध पत्र प्रेषित करने हेतु अधीक्षक जेलर को निर्देशित किया गया। निरीक्षण के दौरान दो बंदियों द्वारा अपने मामले की पैरवी हेतु सरकारी अधिवक्ता दिलाये जाने की याचना की गयी, जिसके संबन्ध में तत्काल कार्यवाही करते हुए लीगल एड डिफेन्स काउन्सिल को उक्त महिला बंदियों के मामले की पैरवी संबंधित में करने हेतु निर्देशित किया गया। विगत निरीक्षण में सिद्धदोष बंदी सतीश जो कि जुर्माना अदा न कर पाने की एवज में सजा काट रहा था उसकी समस्या को सुनकर सचिव द्वारा उसके परिवार के अन्य जनों से संपर्क स्थापित कर उसका मु० 8000/- रूपये का जुर्माना जमा कराया गया जिससे उसकी रिहायी जिला कारागार से करायी जा सकी।
सचिव श्रीमती जासयवाल द्वारा लीगल एड प्राप्त करने वाले विचाराधीन वंदियो के रजिस्टर लीगल एड क्लीनिक के रजिस्टर का निरीक्षण करते हुए लीगल एण्ड क्लीनिक में कार्यरत पराविधिक स्वयं सेवक को जिला कारागार में निरूद्ध बदियों को विधिक सहायता प्रदान किये जाने के हेतु दिशा निर्देश दिये गये। साथ ही साथ जेल पर नियुक्त लीगल एड डिफेन्स काउन्सिल के अधिवक्ता मो० सैफ को निर्देशित किया गया कि जेल के प्रत्येक बैरक में कार्यरत जेल पराविधिक स्वयं सेवक के माध्यम से प्रत्येक ऐसे विचाराधीन बन्दी की पहचान करे जोकि शमनीय अपराध में जेल में निरूद्ध है एवं ऐसे बंदी जो कारित अपराध की सजा अवधि के आधी सजा भुगत चुके है जो धारा 436ए सी०आर०पी०सी० के लाभ प्राप्त करने के अधिकारी है और ऐसे विचाराधीन बन्दी जिनका कोई पैरोकार नहीं है और जो प्राईवेट वकील करने में तथा ऐसे बदी जो जमानत स्वीकार होने के D7 दिन बाद भी जमानतदार दाखिल कर पाने में अक्षम है तो उनकी सूची नय प्रार्थना पत्र आवश्यक कार्यवाही हेतु जेलर/अधीक्षक के माध्यम से सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यालय में प्रेषित करना सुनिश्चित करे।
