13 को लोहड़ी, 14 को पोंगल व 15 को मनायी जायेगी मकर संक्रांति



नई दिल्ली : शास्त्रों के अनुसार सूर्य जब तक मकर राशि में प्रवेश नहीं करते तब तक मकर संक्रांति का पर्व नहीं मनाना चाहिए. मकर संक्रांति पर स्नान, ध्यान और दान-पुण्य का विशेष महत्व है. | 15 को सुबह 5: 27 बजे सूर्य का धनु से मकर राशि में होगा प्रवेश

मकर संक्रांति का त्योहार इस साल 14 की जगह 15 जनवरी को मनाया जायेगा. इस संबंध में पंडित गुणानंद झा ने बताया कि 14 जनवरी तक खरमास है. 15 को सुबह पांच बजकर 27 मिनट पर सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं. इस दिन से सूर्य धरती के उत्तरी गोलार्ध में आ जाता है. इसलिए इसे उत्तरायण पर्व भी कहा जाता है. उदया तिथि की मान्यता होने के कारण मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनाना शुभ है. शास्त्रों के अनुसार सूर्य जब तक मकर राशि में प्रवेश नहीं करते तब तक मकर संक्रांति का पर्व नहीं मनाना चाहिए. मकर संक्रांति पर्व पर स्नान, ध्यान और दान-पुण्य का विशेष महत्व है. इस दिन दान-पुण्य करने से ग्रह दोष समाप्त होते हैं. सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही खरमास समाप्त हो जायेगा.


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