
रांची: रांची जमीन घोटाला से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ जारी ईडी की कार्रवाई से उपजे सियासी संकट के मद्देनजर महागठबंधन सरकार ने प्लान-बी तैयार कर लिया है। इस कड़ी में मंगलवार देर शाम कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास में सत्ताधारी दल की बैठक में सभी विधायकों से एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर लिया गया है जिसमें बिना किसी का नाम लिए यह अंकित है कि सियासी संकट की स्थिति में अपने उत्तराधिकारी के रूप में हेमंत सोरेन जिसे भी अधिकृत करेंगे, विधायकों का उसे पूरा समर्थन रहेगा। कहा जा रहा है कि यदि कल पूछताछ के दौरान बात मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी तक पहुंचती है तो सत्तारुढ़ दल इस प्लान को आगे बढ़ाएंगे। हेमंत सोरेन के उत्तराधिकारी के रूप में उनकी पत्नी कल्पना सोरेन, छोटे भाई और दुमका विधायक बसंत सोरेन और वरीय झामुमो नेता चंपाई सोरेन का नाम सियासी गलियारों में चर्चा में है। जानिए
दोपहर की मीटिंग में भी मौजूद थीं कल्पना सोरेन
गौरतलब है कि मंगलवार को दोपहर तकरीबन 1 बजे कांके स्थित मुख्यमंत्री आवास में सत्ताधारी दल की बैठक आयोजित हुई थी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इसमें मौजूद थे। सबसे दिलचस्प बात इस बैठक में कल्पना सोरेन की मौजूदगी थी। तभी से कयासों को बल मिला था कि कल्पना सोरेन विधायक दल की नेता चुनी जा सकती हैं। इससे पहले जब भी मुख्यमंत्री से ईडी की पूछताछ को लेकर झारखंड की सियासत में हलचल हुई, राजनीतिक गलियारों में कल्पना सोरेन को हेमंत सोरेन का उत्तराधिकारी बताया जाता रहा है। दरअसल, जब 31 दिसंबर 2023 को गांडेय के झामुमो विधायक डॉ. सरफराज अहमद ने इस्तीफा दिया था तो चर्चा शुरू हुई थी कि झारखंड मुक्ति मोर्चा ईडी की कार्रवाई के मद्देनजर किसी भी प्रकार के सियासी संकट की स्थिति में कल्पना सोरेन का नाम आगे बढ़ाएगी और इसे सहयोगी दलों का समर्थन भी मिल जायेगा। गौरतलब है कि गांडेय सामान्य सीट है।
वैसे तो सोरेन परिवार के किसी भी सदस्य के लिए दुमका और बरहेट सुरक्षित सीट रही है लेकिन चूंकि, कल्पना सोरेन झारखंड की स्थानीय निवासी नहीं हैं। उनका मायका ओडिशा में है इसलिए गांडेय के रूप में सामान्य सीट खाली कराई गई जहां से उनको उपचुनाव लड़ाया जा सके।