हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर मेहमान पक्षी स्वामफेन पहुंची सरायकेला; झाड़ियां में फंसी मिली



सरायकेला: क्षेत्र के लिए अनजान पक्षी के रूप में एक नीले रंग की पक्षी सरायकेला के धोबासाई स्थित तालाब के समीप झाड़ियां में फंसी हुई मिली। सुबह नित्य कर्म करने पहुंचे लोगों ने जब उक्त पक्षी को झाड़ियां में फंसा हुआ पाया तो लोगों की उत्सुकता के साथ-साथ पक्षी को देखने के लिए भीड़ भी जमा होने लगी। मौके पर लोगों ने स्नेक कैचर बर्ड एंड नेचर लवर राजा बारीक को मोबाइल पर इसकी सूचना दी। जिसके बाद राजा बारिक ने मौके पर पहुंचकर बेहद ही सुरक्षित तरीके से उक्त नीले रंग की पक्षी को झाड़ियों से निकाल कर रेस्क्यू किया। और इसकी सूचना स्थानीय वन विभाग को तत्काल दी। 

इसके बाद रेस्क्यू किए गए पक्षी के फोटो खींचने और इंटरनेट पर उसके बारे में जानकारी हासिल करने का लंबा दौर शुरू हुआ। एक अमूमन जानकारी के तहत रेस्क्यू किए गए पक्षी की पहचान स्वामफेन पक्षी के रूप में की गई। जो हजारों किलोमीटर यात्रा कर ऑस्ट्रेलिया या फ्रांस जैसे देश से सरायकेला तक पहुंचने का अंदाजा लगाया गया। साथ ही यह भी अंदाजा लगाया गया कि किसी कारण से सरायकेला से गुजरने के क्रम में झाड़ियां में आ फंसी। रेलिडाए कुल के पक्षियों का एक जीव वैज्ञानिक वंश के रूप में पहचान किए गए उक्त पक्षी को भारत वर्ष में कीचमुर्गी के रूप में जाना जाने की बात कही गई। वन विभाग द्वारा राजा बारीक को जानकारी देते हुए बताया गया कि इस प्रकार के प्रवासी पक्षी इन दोनों सीतारामपुर डैम में देखे जा रहे हैं। 

इसके बाद वन विभाग के निर्देश पर राजा बारिक ने रेस्क्यू किए गए उक्त पक्षी को सीतारामपुर डैम ले जाकर उसके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित तरीके से छोड़ दिया गया। बहरहाल मेहमान पक्षी के सरायकेला में दर्शन होने से लोगों में उत्सुकता देखी गई। साथ ही कयास भी लगाया गया कि यदि उचित व्यवस्था और साधन का माहौल तैयार किया जाए तो ऐसे अन्य प्रवासी पक्षी भी दूर विदेशों से सरायकेला तक का सफर करेंगे। क्योंकि आसपास के क्षेत्रों में जिले में हरियाली और जल स्रोतों को देखते हुए मेहमान पक्षियों के आगमन की अपार संभावनाएं हैं। जो बर्ड लवर्स के लिए एक नया प्रोस्पेक्ट तैयार कर सकता है।

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