- सीमा पर रोककर किया बैरंग वापस, जबकि पुलिस पर पूर्व सांसद के अत्याचार के खिलाफ बोल रहे थे अमिताभ
कन्नौज: पूर्व सांसद के खिलाफ अनिश्चित कालीन सत्याग्रह करने कन्नौज जा रहे पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को पुलिस ने जिले की सीमा पर रोक लिया। यहां उन्हें एक नोटिस देकर अंदर नहीं घुसने दिया। जिसके बाद वह वापस लखनऊ लौट गए।
आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर, उनकी पत्नी डॉ. नूतन ठाकुर के साथ शैलेंद्र अस्थाना, शहजाद अली और रणजीत सिंह लखनऊ से कन्नौज आ रहे थे। इसकी सूचना मिलने पर सीमा पर सीओ सिटी कमलेश कुमार और कोतवाली प्रभारी जेपी शर्मा बॉर्डर पर पहुंचे। जहां उनकी कार रोक ली और कन्नौज की सीमा में प्रवेश करने से रोक दिया। यहां उन्हें पुलिस की ओर से धारा 168 बीएनएसएस का एक नोटिस थमाया गया। जिसमें हवाला दिया गया कि अनिश्चित कालीन धरने के लिए पूर्व आईपीएस अधिकारी ने किसी सक्षम अधिकारी से कोई अनुमति नहीं ली।
कार्यकर्ताओं द्वारा नारेबाजी की जा सकती है
इसके अलावा जो धरना स्थल प्रस्तावित है, वो एक बाजार है। वहां धरना-प्रदर्शन करने से लोगों की दिनचर्या प्रभावित होगी और यातायात व्यवस्था में व्यवधान होगा। इसके अलावा आजाद अधिकार सेना के असामाजिक प्रकृति के कार्यकर्ताओं द्वारा नारेबाजी की जा सकती है। नोटिस में कहा गया कि आपके द्वारा संज्ञेय अपराध किए जाने की सूचना है। जिससे कानून व्यवस्था में अप्रिय स्थित उत्पन्न हो सकती है। इसलिए धरना निषिद्ध कर आपको जिले में प्रवेश करने से रोका जाता है।
भाजपा सरकार अपना रही दोहरा चरित्र
अमिताभ ठाकुर ने इस आदेश को अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि पुलिस कर्मियों की पिटाई करने वाले भाजपा के पूर्व सांसद सुब्रत पाठक के खिलाफ उनकी पार्टी कार्रवाई करवाकर ही दम लेगी। भाजपा सरकार अपराधियों पर अंकुश लगाने के मामले में दोहरा चरित्र अपना रही है। यही वजह है कि खुद की पार्टी के नेता द्वारा अपराध किए जाने पर सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही।
