कन्नौज: कौशल विकास का उद्देश्य कैदी को राष्ट्र की मुख्य धारा में लौटाना है: लवली





बृजेश चतुर्वेदी, कन्नौज: अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश / पूर्णकालिक सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण लवली जायसवाल  द्वारा आज  जिला कारागार का निरीक्षण कर महिला सशक्तिकरण एवं सुरक्षा से संबंधित कानूनों एवं बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य के सम्बन्ध में जागरूकता शिविर का आयोजन का आयोजन किया गया। उन्होंने इस अवसर पर बैंक आफ इंडिया द्वारा स्थापित किये गए कौशल विकास केंद्र आरसेटी का उद्घाटन भी किया।

निरीक्षण के दौरान सचिव द्वारा जेल में निरूद्ध बंदियों से उनके स्वास्थ्य संबंधी जानकारी लेते हुये उनके खानपान, चिकित्सा एवं मुकदमों में पैरवी हेतु अधिवक्ताओं के उपलब्ध होने अथवा न होने के संबंध में जानकारी ली गयी तथा उनकी समस्याओं को सुना गया एवं उनके निराकरण हेतु जेलर एवं जेल अधीक्षक को निर्देशित किया गया एवं लीगल एड प्राप्त करने वाले विचाराधीन बंदीयों के रजिस्टर लीगल एड क्लीनिक के रजिस्टर का अवलोकन करने के उपरांत लीगल एण्ड क्लीनिक में कार्यरत पराविधिक स्वयं सेवक को जिला कारागार में निरुद्ध बंदियों को विधिक सहायता प्रदान किये जाने के हेतु दिशा निर्देश दिये गये।

सचिव द्वारा बंदियों से उनके स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी ली गयी। जिस पर बंदियों ने जिला जेल के अस्पताल में किसी भी प्रकार की कोई भी समस्या न होने एवं समुचित इलाज एवं दूध, फल एवं खाने का सही से मिलने का कथन किया। सचिव द्वारा पाकशाला का भी निरीक्षण किया गया जहाँ उचित साफ सफाई पाई गयी। सचिव द्वारा जेल में संचालित कौशल विकास केंद्र के लोकार्पण के बाद लौटी सचिव लवली जायसवाल ने कहा कि कौशल विकास कार्यक्रम का उद्देश्य कैदियो के रिहा होने पर उन्हें समाज की मुख्य धारा में जुड़कर स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षित करना है ताकि वे अपने परिवार का पालन पोषण कर सम्मान की जिंदगी जी सके।
निरीक्षण के दौरान 02 बंदियों द्वारा अपने मामले की पैरवी हेतु सरकारी अधिवक्ता दिलाये जाने की याचना की गयी जिसके संबन्ध में तत्काल कार्यवाही करते हुए जेल विजिटर लीगल एड डिफेन्स काउन्सिल मो० सैफ को इन बंदियों के मामले की पैरवी संबंधित न्यायालय में करने का निर्देश दिया गया।

सचिव द्वारा महिला बैरक में साक्षरता शिविर का आयोजन कर महिला सशक्तिकरण एवं सुरक्षा से संबंधित कानूनों एवं बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य हेतु जागरूक करते हुए बताया गया कि दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961, दहेज देने और लेने की प्रथा को रोकने के लिए बनाया गया एक कानून है। दहेज देने या लेने पर कम से कम पांच साल की जेल और कम से कम 15,000 रुपये या दहेज की रकम, जो भी ज्यादा हो, का जुर्माना हो सकता है एवं घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के अन्तर्गत महिला को उसके वैवाहिक घर में रहने का अधिकार सुनिश्चित करता है। इस अधिनियम में कानून के तहत विशिष्ट प्रावधानों के साथ एक विशेष विशेषता है जो एक महिला को "हिंसा के लिए सुरक्षा प्रदान करती है। हालांकि इस अधिनियम में दीवानी और आपराधिक प्रावधान है, लेकिन एक महिला पीडित 60 दिनों के भीतर तत्काल दीवानी उपचार प्राप्त कर सकती है। पीडित महिलाएँ इस अधिनियम के सात किसी भी पुरुष वयस्क अपराधी के खिलाफ मामला दर्ज कर सकती है जो उसके साथ में है।

लैगिक अपराधों से संरक्षण अधिनियम के अन्तर्गत 18 साल से कम उम्र की बालिकाएं लड़की के साथ यौन अपराध हुआ या करने का प्रयास किया गया, तो ऐसे मामले पाक्सो कानून के अंतर्गत आते हैं। यह कानून बच्चों को लैंगिक हमले, लैंगिक उत्पीड़न और अश्लील चित्र व साहित्य के इस्तेमाल अपराधों से सुरक्षा प्रधान करता है। ऐसे अपराधों का विचारण करने के लिए विशेष न्यायालयों की स्थापना की गई है। देश में कार्य स्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न रोकने के लिए 2013 में कानून बनाया गया था। इसे  प्रिवेशन ऑफ सेक्सुअल हैरेसमेंट एक्ट कहा जाता है। किसी भी प्राईवेट सेक्टर, सरकारी या गैर सरकारी संस्थान जहां महिलाए कार्य करती है उसमें महिलाओं के कार्य स्थल पर लैगिंक उत्पीड़न से संरक्षण और लैंगिक उत्पीडन के परिवादों के निवारण के लिए प्राईवेट सेक्टर, सरकारी या गैर सरकारी संस्थानों में समिति बनाई गई है उन समितियों के तहत पीड़ित महिलाए अपनी सूचना समिति को देगी और समिति उस पर कार्यवाही करेगी।  बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के विषय में बताया गया कि इस अधिनियम के तहत, 21 साल से कम उम्र के पुरुष या 18 साल से कम उम्र की महिला के विवाह को बाल विवाह माना जाता है। 

बाल विवाह को दंडनीय अपराध माना गया है। बाल विवाह करने वाले वयस्क पुरुष या बाल विवाह को संपन्न कराने वालों को दो साल तक की जेल या एक लाख रुपये लक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 12 के अन्तर्गत किसी भी महिला को निःशुल्क विधिक सेवा प्राप्त करने का अधिकार है। इसके अतिरिक्त अपर जनपद न्यायाधीश सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा उपस्थित नहिलाओं को बताया गया कि यदि किसी को किसी भी प्रकार की विधिक सहायता या जानकारी चाहिए तो राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली द्वारा संचालित टोल फ्रि हेल्पलाईन नम्बर- 15100 पर कॉल कर तत्काल सहायता व जानकारी प्रत्म कर सकते है या राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली बारा संचालित 1.5 MS Portal के माध्यम से भी आप अपनी समस्याओं का निदान कर सकते है। इसके अतिरिक्त अपर जनपद न्यायाधीश / सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ द्वारा दिनांक 14.12 2024 को जनपद कन्नौज में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत के बारे में भी बताया गया गया। कार्यक्रम के अन्त में उपस्थित सभी प्रतिभागियों की नालसा थीम सांग "एक मुट्ठी आसमां पर हक हमारा भी तो है" सुनाकर उन्हे जागरूक किया गया।

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