पाकुड़: मलेरिया की जद में के 23 गांव, बाबूलाल मरांडी ने किया दौरा

 

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पाकुड़: झारखंड के पाकुड़ जिले के कुटलो गांव में मलेरिया फैल गया है। लिट्टीपाड़ा के कुटलो गांव के साथ ही इसके आसपास के लगभग दो दर्जन गांव भी मलेरिया की जद में आ गये हैं। बीजेपी झारखंड प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी इन गांवों के दौरे पर हैं। उन्होंने मामले की अनदेखी के लिए राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है। कहा है सीएम हेमंत पाकुड़ आने से डर रहे हैं। उनको शायद खुद ही बीमार हो जाने का खतरा सता रहा है। इधर, जिला प्रशासन का कहना है कि जिन लोगों में मलेरिया के लक्षण मिले हैं, वे रक्त की जांच कराने से कतरा रहे हैं। ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए उपायुक्त, सिविल सर्जन और एसडीओ ने खुद रक्त जांच करायी। अधिकारियों को देखकर ग्रामीण रक्त जांच कराने के लिए तैयार हुए। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने यहां शिविर लगाकर लोगों की जांच और इलाज करना शुरू कर दिया है। कैंप को जिले के सिविल सर्जन खुद मॉनिटर कर रहे हैं। 


पांच बच्चों की हो चुकी है मौत 

गौरतलब है कि लिट्टीपाड़ा गांव में ही कुछ दिन पहले पांच बच्चों की मौत हो गयी थी। जांच करने पर पता चला था कि सभी बच्चों की मौत ब्रेन मलेरिया से हुई है। इस खबर के मिलने के बाद उपायुक्त ने खुद से गांव का दौरा किया और यहां चल रहे सामुदायिक चिकित्सा केंद्र और अन्य स्वास्थ्य शिविरों की पड़ताल की। बहरहाल आज जिन लोगों ने रक्त की जांच करायी है, उनमें मलेरिया रोग के लक्षण मिले हैं। ऐसे लोगों की संख्या लगभग दर्जनभर बतायी जाती है। साथ ही अधिकारियों को स्थानीय भाषा को लेकर भी समस्या पेश आ रही है। उपायुक्त के आदेश पर स्थानीय भाषा में माइकिंग कराने और लोगों को जागरुक करने का निर्णय लिया गया है। उपायुक्त ने लोगों स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लिट्टीपाड़ा में ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मियों के साथ एक आवश्यक बैठक की है। इसी में बताया गया है कि कुटलो गांव के आसपास के लगभग दो दर्जन गांव भी मलेरिया की जद में हो सकते हैं। उपायुक्त ने इस दिशा में त्वरित कार्यवाही करते हुए सभी गांवों का सर्वे कराने का निर्देश दिया है। 

क्या कहते हैं जिम्मेदार 
जिले के उपायुक्त मृत्युंजय बर्णवाल ने स्वीकार किया है कि कुटलो और आसपास के गांव में मलेरिया फैला हुआ है। हालांकि इसे नियंत्रित करने के लिए प्रशासन सभी आवश्यक कदम उठा रही है। उपायुक्त ने कहा कि लोगों में जागरूकता की कमी है। लोग कुछ होने पर अक्सर झोला छाप चिकित्सक और ओझा-गुणी के चक्कर में पड़ जाते हैं। इसी के कारण कई लोग जांच कराने से डरने लगते हैं। लोगों के मन से पहले इस डर को निकालना जरूरी है। जिन लोगों ने आज जांच करायी है, उनमें मलेरिया के लक्षण मिले हैं। उनका उपचार कैंप लगाकर किया जा रहा है। 

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