इन सैंपल्स को जांच के लिए लेबोरेट्री भेजा जाएगा ताकि यह पता चल सके कि यह बीमारी सामान्य है या फिर कोई नया वायरस पैर पसार रहा है। केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'यह पूरी तरह से किफायती फैसला है। अब तक चिंता की कोई बात सामने नहीं आई है, लेकिन सतर्क रहना जरूरी है। कोरोना के बाद से ही सांस लेने संबंधी परेशानी वाले मामलों की निगरानी के लिए एक व्यवस्था बनी हुई है। अब तक ऐसा कुछ नहीं है, जिससे पता चले कि भारत में कोई खतरा है।' फिर भी सरकार कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है।
खासतौर पर बच्चों और युवाओं के ही शिकार बनने से भी चीन समेत कई देशों की नींद उड़ी हुई है। हालांकि एम्स के एक डॉक्टर ने कहा कि यह चिंता की बात नहीं है। सर्दियों के मौसम में अकसर लोग सर्दी, जुकाम की समस्या से पीड़ित होते हैं। इन समस्याओं के जोर पकड़ने पर कुछ लोगों को सांस लेने में भी थोड़ी परेशानी हो जाती है, लेकिन यह किसी भी तरह की चिंता की बात नहीं है। फिर भी स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे कोरोना के दौर में तय गाइडलाइंस को फिर से लागू करें। इससे निगरानी व्यवस्था बेहतर होगी।
विश्व स्वास्थ्य संगठन का भी कहना है कि अक्टूबर 2023 के मध्य से ही चीन में बच्चों और युवाओं में सांस की बीमारी के मामले सामने आए हैं। इन केसों में लगातार इजाफा भी हुआ है। इसलिए हम निगरानी कर रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चीन से कुछ और जानकारी मांगी है, जिससे तय हो सके कि बीमारी बढ़ने की वजह क्या है। कुछ जानकार इसे लेकर आशंका जता रहे हैं कि क्या यह एक नई महामारी की दस्तक है? हालांकि अब तक इसे लेकर कुछ भी ठोस तौर पर नहीं कहा जा सकता।
