नई दिल्ली: एक अकेला कितनों पर भारी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल राज्यसभा में यह पंक्ति कही थी। आज हिंदी हर्टलैंड ने इसका समर्थन कर दिया। रविवार को तीन राज्यों में भाजपा की जबर्दस्त जीत हुई। इन चुनावों में पीएम मोदी का चेहरा ही आगे था क्योंकि बीजेपी ने किसी भी प्रदेश में अपना कोई मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित नहीं किया था। भाजपा ने मध्य प्रदेश में नारा दिया- एमपी के मन में मोदी। लेकिन इसका असर एमपी से निकलकर अन्य राज्यों में भी हुआ। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी इसका टेम्प्लेट बन गया क्योंकि वह 'सामूहिक नेतृत्व' की रणनीति के साथ चला गया और निर्णायक साबित हुआ। परिणामों को 'मोदी की गारंटी' पर जनता के भरोसे के रूप में भी देखा जा रहा है। कांग्रेस के घोषणापत्र में दी गई 'गारंटी' के मुकाबले में 'मोदी की गारंटी' पर मतदाताओं ने ज्यादा यकीन किया।
पीएम ने पहली बार भारत मंडपम के अनावरण के दौरान 'मोदी की गारंटी' का इस्तेमाल किया। राज्य विधानसभा के चुनावों के लिए टोन सेट करने के लिए बीजेपी नेताओं ने इस घोषणा को बार-बार दुहराया। जनता ने इसे हाथोंहाथ ले लिया। चुनाव परिणामों से साफ हो गया कि लोगों का मोदी पर विश्वास कायम है। मतदाता उन्हें भरोसे, आशा एवं विश्वसनीयता का प्रतीक मानते हैं। यह 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले पार्टी के लिए एक सकारात्मक संकेत है क्योंकि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री के तौर पर तीसरा कार्यकाल पाकर जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड की बराबरी करने जा रहे हैं।
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