'नो वन किल्ड एलीफेंट', झारखंड में हाथियों की मौत पर भिड़ा वन और बिजली विभाग; दोषी कौन?

 

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जमशेदपुरः पूर्वी सिंहभूम के मुसाबनी वन क्षेत्र और चकुलिया में पिछले दिनों 7 हाथियों की मौत हो गई थी। जिसके बाद वन विभाग और बिजली निगम आमने-सामने आ गए हैं। दोनों विभागों में एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं। हाथियों की मौत के बाद पहले बिजली निगम ने जिम्मेदार होने से पल्ला झाड़ा। इसके बाद वन विभाग के अधिकारी जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया है। 


बिजली विभाग पर केस 
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) वाइल्ड लाइफ कुलवंत सिंह ने हाथियों की मौत को गंभीर अपराध बताया है। कहा कि इस मामले में दोषी बिजली विभाग के अधिकारी बख्शे नहीं जाएंगे। बिजली विभाग की लापरवाही के कारण हाथियों की मौत हुई है। उन्होंन बताया कि तारों की ऊंचाई को ले भारत सरकार की स्पष्ट गाइडलाइन है। जिले में कई जगह तारों की ऊंचाई कम है। वाइल्ड लाइफ एक्ट के तहत बिजली विभाग के दोषियों के खिलाफ केस किया गया। उन्होंने बताया कि वन विभाग की ओर से कई बार बिजली विभाग के सा पत्राचार किया गया है। पूरे कोल्हान में हाथियों के मूवमेंट वाले इलाके में तारों क ऊंचाई ठीक करने के लिए कहा है। बिजली विभाग को पूरी सूची सौंपी गई है। लेकिन ध्यान नहीं दिया जाता है। 

दोनों विभाग हाथियों के मूवमेंट पर रखेंगे नजर ऐसी सहमति बनी थी

हाथियों के मौत के बाद बिजली निगम के अधिकारी और डीएफओ के स्तर पर को-ऑर्डिनेशन पर सहमति बनी थी, जिसमें तय किया गया है कि दोनों विभाग हाथियों के मूवमेंट पर नजर रखेंगे और सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाएगा, जिससे दुर्घटना को रोकी जा सके। यह समझौता तारों की ऊंचाई ठीक करने पर हुआ था। लेकिन इस मामले में वन विभाग ने कोई पहल नहीं की। कोल्हान के क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक रवि रंजन ने कहा कि दोषी बख्शे नहीं जाएंगे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। सर्वे किया जा रहा है। जहां-जहां बिजली के तार नीचे झुलते मिलेंगे, सभी तारों को हाथी के रेंज से काफी ऊपर किया जाएगा। 

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